25 अगस्त 2020 - 12:12
ईरान, अमरीका और ट्रिगर मेकेनिज़म की कहानी, अंजाम क्या होगा?

अमरीका के राष्ट्रपति जिस तरह से ज़ाहिर कर रहे हैं उससे लगता है कि वे किसी भी तरह से और किसी भी रूप में ईरान के ख़िलाफ़ ट्रिगर मेकेनिज़म को सक्रिय करना चाहते हैं।

अगर यह मान भी लिया जाए कि डोनल्ड ट्रम्प किसी भी तरह ट्रिगर मेकेनिज़म को सक्रिय करने और ईरान के ख़िलाफ़ सभी प्रतिबंधों को लौटाने में कामयाब हो भी जाते हैं तब भी वास्तविकता यह है कि ईरान पर दबाव बढ़ाने में वाइट हाउस को कुछ ख़ास सफलता नहीं मिलेगी। प्रतिबंधों को लौटाने का खेल दो साल पहले, परमाणु समझौते से अमरीका के निकल जाने के बाद शुरू हुआ था और इसके लिए दो तरह से कोशिशें की गई थीं। पहले तो विभिन्न प्रकार के अमरीकी प्रतिबंध ईरान पर लगाए गए और फिर अमरीका के डर से बहुत से देशों ने व्यवहारिक रूप से प्रतिबंधों के मामले में ईरान के ख़िलाफ़ काम किया। इस आधार पर कहा जा सकता है कि अगर ट्रिगर मेकेनिज़म या स्नेप बैक का विकल्प सक्रिय हो भी जाता है तो ट्रम्प को कोई ख़ास उपलब्धि हासिल नहीं होगी क्योंकि ईरान पर पहले ही से प्रतिबंध लगे हुए हैं। इस तरह ट्रम्प, अपने इस क़दम को राष्ट्रपति चुनाव में भुना नहीं पाएंगे।

 

ईरान को उसकी मीज़ाइल क्षमता व क्षेत्र में उसके प्रभाव को कम करने के लिए वार्ता पर तैयार करने के उद्देश्य से अमरीकी प्रतिबंधों की बहाली की कोशिशें की जा रही हैं। अगर ट्रम्प मेकेनिज़म सक्रिय कर दिया जाता है तो न सिर्फ़ यह कि ट्रम्प के हाथ कुछ नहीं लगेगा और ईरान से वार्ता की उनकी इच्छा पूरी नहीं होगी बल्कि राष्ट्रपति चुनाव के अवसर पर जनमत उनसे यह गंभीर सवाल ज़रूर करेगा, जिसका उनके पास कोई उत्तर नहीं होगा कि एक व्यर्थक और निरर्थक मामले में "डबल वीटो" का मेकेनिज़म क्यों इस्तेमाल किया गया? और अमरीका के साथ ही साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रतिष्ठा को क्यों आघात लगाया गया जबकि ईरान अपने रुख़ पर अडिग है?

 

ट्रम्प यह भी चाह रहे हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में जो बायडन से आगे बढ़ने के लिए कोरोना वायरस की वैकसीन को चुनाव से पहले तुरुप के पत्ते के तौर पर इस्तेमाल करें। सवाल यह है कि क्या ट्रिगर मेकेनिज़म भी, विदेश नीति में ख़ाली पड़ी उनकी झोली को भर सकता है? हालांकि इस सवाल के जवाब के लिए समय की ज़रूरत है लेकिन ट्रम्प का चार साल का सत्ताकाल यह दर्शाता है कि वे और वाइट हाउस के अधिकारी जब ईरान के बारे में फ़ैसले करते हैं तो प्रायः उनके फ़ैसलों में समीकरणों की ग़लतियां होती हैं। ट्रिगर मेकेनिज़म भी आकर चला जाएगा, जैसा कि ईरान के सिलसिले में अमरीका की बहुत सी नीतियां बिना कुछ हासिल किए ही समाप्त हो चुकी हैं। अब यह सवाल रह जाता है कि ट्रम्प ट्रिगर मेकेनिज़म को किसके ख़िलाफ़ और किस लक्ष्य के अंतर्गत सक्रिय करेंगे? ईरान के ख़िलाफ़? अपने 4 वर्षीय राष्ट्रपति काल के ख़िलाफ़? या फिर वाइट हाउस में रिपब्लिकंस की सरकार जारी रहने के ख़िलाफ़?